Saturday, September 23, 2017

ND TV बिका या नही लेकिन खेल हो गया

ND TV ( New Delhi Television Ltd )  बिका या नहीं। Spice Jet वाले अजय सिंह की हिस्सेदारी बढ़ी या नहीं। इसमें क्या सच्चाई है, यह अभी साफ नहीं है लेकिन एक बात साफ है कि इस मौके का एक  वर्ग  ने  जमकर दोहन किया।  यह वर्ग शेयर बाजार से करो़ड़ों रुपये कमा कर निकल गया । शेयर बाजार में पिछले दो -तीन साल से ND TV के बिकने की खबरें चल रही है । इसे चर्चा भी कह सकते हैं। सबसे पहले दो साल पहले सरला दलाल ने अपने ब्लाग में  ND TV के बिकने की खबर दी थी। उनके मुताबिक रिलायंस समूह इसे Take Over करने जा रहा है। उस समय भी इस स्टाक में तेजी देखने को मिली थी।
पिछले एक महीने से बाजार में यह चर्चा जोरों पर थीं। जिसका नतीजा यह है कि यह स्टाक महज एक महीने में दोगुना हो गया। 29 अगस्त का इसका रेट था 34.00 रुपये।  7 सिंतबर को इसका रेट 68 रुपये पहुंच गया। लगभग दोगुना। उसके बाद  करेक्शन होना ही था। करेक्शन के  बाद यह 47.00 के आस -पास चल रहा था। अजय सिंह  ND TV को Take Over कर रहे हैं । यह खबर आते ही शुक्रवार को  जैसे  ही बाजार खुला यह स्टाक पांच फीसदी के सर्किट पर पहुंच गया। तब तक एक वर्ग करोड़ों कमा कर निकल चुका था। भले ही उत्तर कोरिया की धमकी के बाद बाजार में जबरदस्त गिरावट आई थी। हैरत की बात यह है कि प्रणव राय ने इस खबर का खंडन कर दिया। इसके बावजूद शेयर बाजार इसे मानने को तैयार नहीं हुआ। स्टाक में तेजी बनी रही।

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Monday, July 10, 2017

एनएसई में ट्रेडिंग बंद, शेयर बाजार में अफरातफरी

शेयर बाजार  आज नई ऊंचाइयों 31602 पर पहुंच गया। लेकिन तकनीकी कारणों से एऩएसई में ट्रेडिंग  11.40 बजे तक बंद है । इससे अफरातफरी का माहौल है। जबकि बीएसई में ट्रे़डिंग नहीं रोकी गई। बाजार के कुछ विशेषज्ञों ने बीएसई में भी ट्रेडिंग बंद करने की सलाह दी थी। लेकिन बीएसई ने ट्रेडिंग रोकने से मना कर दिया। 
 एनएसई ने 10.45 बजे दोबारा  ट्रे़डिंग शुरु करने की घोषणा की थी। लेकिन 10.45 में दोबारा ट्रेडिंग शुरू नही हो पाई।
एनएसई ने 10.50 बजे घोषणा की कि  ट्रेडिंग 11.15 बजे शुरू होगी। लेकिन इस बार भी कोशिश बेकार चली गई। सिस्टम शुरू नहीं हो पाया।  11.30 बजे एनएसई ने बताया कि  ट्रेडिंग शुरू करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि कुछ चैनल दावा कर रहे हैं कि एनएसई में आज ट्रेडिंग नहीं होगी। 
भारतीय शेयर बाजार में इतनी बड़ी तकनीकी गड़बड़ी संभवतः पहली बार आई है। तकनीकी गड़बड़ियों से 10-15 मिनट के लिए बाजार कभी कभार बार बंद रहा है। लेकिन  तकनीकी गड़बड़ी के कारण इतने समय तक एनएसई पहली बार बंद हुआ है।
एनएसई ने अबतक तकनीकी गड़बड़ियों के बारे में कोई भी जानकारी नहीं दी है। 

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Friday, March 24, 2017

Indraprastha Medical Corporation Limited टारगेट से तीन गुना ज्यादा

मैंने 4 दिसंबर 2016 को लिखा था कि इंद्रप्रस्थ मेडिकल कारपोरेशन ( Indraprastha Medical Corporation Limited ) आकर्षक रेट पर है। उस दिन 51.25 रुपये पर बंद हुआ था । कम अवधि के लिए मैंने  पांच फीसदी तक मुनाफा की संभावना बताई थी। 8 मार्च 2017को यह शेयर 59.25 तक पहुंचा। लगभग 16 फीसदी मुनाफा। टारगेट से लगभग तीन गुना ज्यादा। अभी भी यह 55.50 के आस-पास चल रहा है, जो करीब दस फीसदी मुनाफा दे रहा है। 


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Sunday, December 4, 2016

Indraprastha Medical Corporation Limited आकर्षक रेट पर

इंद्रप्रस्थ मेडिकल कारपोरेशन ( Indraprastha Medical Corporation Limited )  का रेट फिलहाल आकर्षक है।   शुक्रवार को यह 51.25 रुपये पर बंद हुआ। कम अवधि में पांच फीसदी तक मुनाफा की संभावना है। 

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Saturday, July 16, 2016

लालभाई का पुराना लाल है अतुल

लालभाई का पुराना लाल है अतुल

 Posted by  at 08:16  Add comments
Aug 042010

1947 में आजाद हुआ देश और 1947 में ही बनी अतुल लिमिटेड। यह अरविंद मिल्स के लालभाई समूह की कंपनी है। इसके छह बिजनेस डिवीजन हैं – एग्रो केमिकल, एरोमैटिक्स, बल्क केमिकल व इंटरमीडिएट, रंग, फार्मा संबंधी उत्पाद व पॉलिमर और सभी स्वतंत्र रूप से धंधा बढ़ाने में लगे रहते हैं। कंपनी के 36,000 से ज्यादा शेयरधारक हैं। उसके दफ्तर अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, चीन व वियतनाम तक में हैं जहां से वह अपने विदेशी ग्राहकों की जरूरतें पूरी करती है। कंपनी लगातार अच्छा काम कर रही है और बराबर लाभांश भी दे रही हैं। दो दिन पहले ही उसने प्रति शेयर 4 रुपए का लाभांश घोषित किया है।
उसके शेयर का अंकित मूल्य दस रुपए है और वह बीएसई (कोड-500027) और एनएसई (कोड-ATUL) दोनों में लिस्टेड है। मंगलवार को उसका शेयर थोड़ी सी बढ़त लेकर एनएसई में 109.50 और बीएसई में 109.70 रुपए पर बंद हुआ है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2009-10 में 1190 करोड़ रुपए के धंधे पर 57 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया है। उसका ईपीएस (प्रति शेयर लाभ) 19.22 रुपए है, जबकि प्रति शेयर बुक वैल्यू 125.97 रुपए है। यानी, जहां शेयर 5.71 के मामूली पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है, वहीं उसका भाव बुक वैल्यू से भी कम चल रहा है। वैसे, उसने इसी 26 जुलाई को 121.20 रुपए का उच्चतम स्तर हासिल किया है, जबकि उसका 52 हफ्ते का न्यूनतम स्तर 62.20 रुपए (12 अगस्त 2009) रहा है।
वित्तीय रूप से मजबूत कंपनी की भावी दशा-दिशा भी दुरुस्त दिखती है। करीब दो महीने पहले जून में उसके पॉलिमर डिवीजन ने पॉलिग्रिप ब्रांड का अधिग्रहण किया है। कंपनी के पास अहमदाबाद में अपनी 1400 एकड़ जमीन है। वह कॉरपोरेट गर्वनेंस के मामले में भी पक्की है। कंपनी के चेयरमैन एस एस लालभाई हैं और उसके दस सदस्यों के बोर्ड में सात सदस्य स्वतंत्र निदेशक हैं। इसमें हिंदुस्तान लीवर के पूर्व चेयरमैन एस एम दत्ता का नाम भी शामिल है। कंपनी की 29.66 करोड़ रुपए की इक्विटी में प्रवर्तकों की हिस्सेदारी 42.63 फीसदी है। पिछली चार तिमाहियों से वे थोड़ी-थोड़ी करके अपनी हिस्सेदारी बढ़ाते जा रहे हैं। जाहिरा तौर पर इस शेयर में बढ़ने की गुंजाइश पूरी नजर आती है। लेकिन दूर की सोच रखकर ही निवेश करें।
बाकी चर्चा-ए-खास यह है कि आईएफसीआई बैंकिंग लाइसेंस के लिए आवेदन ही नहीं कर रही है। इसलिए इसमें अगर 10-20 फीसदी का फायदा हो रहा हो तो बेचकर निकल लेना चाहिए। भारती में अगला लक्ष्य 350 रुपए का है। ऋषि लेजर (बीएसई कोड-526861) पर नजर रखने की जरूरत है। कल यह करीब 5 फीसदी बढ़ा है और इसमें कारोबार भी औसत से दोगुना हुआ है। इस्पात इंडस्ट्रीज के 21 रुपए तक जाने का इंतजार कीजिए और पहले खरीदा हो तो अब बेचकर मुनाफा कमा लीजिए क्योंकि इसका प्रवर्तक बड़ा खडूस किस्म का है और अपना ही शेयर दबाकर रखता है।
 ( अर्थकाम) http://www.arthkaam.com/atul-limited-a-good-buy-from-lalbhai-gp/3870/




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जागरण में 10% बस 10-15 दिन में

जागरण में 10% बस 10-15 दिन में

 Posted by  at 08:51  Add comments
Jan 24 2012

मैं कोई लंबी-चौड़ी बात नहीं करता। क्या करूं! लंबी नहीं, छोटी नजर है अपनी। साल-दो साल भी नहीं, दस-पंद्रह दिन की सोचता हूं। किसी की टिप्स नहीं, ठोस खबरों पर काम करता हूं। इन्हीं के आधार पर आपको बता रहा हूं कि जागरण प्रकाशन में तेजी आनेवाली है। इसका शेयर दस-पंद्रह दिन में 110 रुपए को पार कर सकता है। यानी, इसमें खटाखट दस फीसदी तक का रिटर्न मिल सकता है। पांच फीसदी तो कहीं नहीं गया।
जागरण प्रकाशन का दो रुपए अंकित मूल्य का शेयर कल, 23 जनवरी 2012 को बीएसई (कोड – 532705) में 98 रुपए और एनएसई (कोड – JAGRAN) में 98.15 रुपए पर बंद हुआ है। बी ग्रुप का मिड कैप स्टॉक है। लिक्विडिटी या तरलता ठीकठाक है। इसलिए खरीदने-बेचने में कोई दिक्कत नहीं आएगी। जैसे, कल बीएसई में इसके 3524 शेयरों में ट्रेडिंग हुई, जिसमें से 66.60 फीसदी डिलीवरी के लिए थे। इसी तरह एनएसई में ट्रेड हुए 9033 शेयरों में से 60.80 फीसदी डिलीवरी के लिए थे।
एक बात नोट कर लें कि डिलीवरी का अनुपात ज्यादा होने का मतलब उसमें हवा-हवाई नहीं, बल्कि सही निवेशक आ रहे हैं। वैसे एक बात और बता हूं कि जब भी आप खरीदने जा रहे हों तो थोड़ा रुककर कल्पना कर लीजिए कि बेच कौन रहा होगा। या, बेच रहे हों तो सोच लीजिए कि खरीद कौन रहा होगा। शेयर बाजार में निवेश टेनिस के मैच जैसा है। कोई दबाता है तो कोई उठाता है। हमेशा सामनेवाले पक्ष की धारणा को सोचकर चलेंगे तो बेवजह की भावुकता और तमाम तरह की मूर्खता से बच जाएंगे।
खैर, जागरण प्रकाशन में सच्चे निवेशकों की दिलचस्पी इसलिए भी बढ़ी हुई है क्योंकि करीब महीने भर पहले 22 दिसंबर 2011 को इसने 90.20 रुपए पर 52 हफ्ते का बॉटम पकड़ा था। उसके बाद दो शुक्रवार को यह उठने की भरपूर कोशिश कर चुका है। पहली बार 30 दिसंबर 2011 को जब यह ऊपर में 103.80 रुपए तक चला गया था। और, दूसरी बार पिछले हफ्ते 20 जनवरी 2012 को, जब यह 102.60 रुपए तक चला गया था। फिलहाल 98 रुपए पर है। इस स्तर पर खरीदना इसे घाटे का सौदा नहीं है।
कंपनी प्रिंट मीडिया में देश में सबसे ज्यादा पढा जानेवाला अखबार दैनिक जागरण का प्रकाशन करती है। हिंदी इलाके का निर्विवाद नेता है यह अखबार। कई बार लगा कि दूसरे अखबार इसे दबा ले जाएंगे। लेकिन समय की नब्ज को पकड़ने में प्रबंधन की दक्षता और परंपरा से मिले खांटी बनियापन ने कभी इस समूह को दबने नहीं दिया।   इस समूह के पर्याय रहे स्वर्गीय नरेंद्र मोहन गुप्ता जी  के बाद समूह की बागडोर संभालने वाले संजय गुप्ता 24 कैरेट के प्रोफेशनल हैं। मौके को ताड़ना और धंधा करके निकल जाना उनकी फितरत है। टेलिविजन न्यूज़ का हल्ला उठा तो चैनल-7 बना डाला और घाटे के दलदल में फंसे बगैर उसे टीवी-18 ग्रुप को बेच डाला और मजे में मुनाफा कमाकर निकल गए। जागरण की साइट याहू को बेचकर फायदा कमाया। नई पीढ़ी को लक्ष्य करना हुआ तो आई-नेक्स्ट का प्रयोग कर डाला।
यह सच है कि चालू वित्त वर्ष 2011-12 में कंपनी का धंधा अच्छा नहीं चल रहा। जून तिमाही में उसका शुद्ध लाभ 10.58 फीसदी घटा था। सितंबर तिमाही में भी इसमें 17.53 फीसदी की कमी आ गई। सितंबर तिमाही में उसकी आय 10.32 फीसदी बढ़कर 305.41 करोड़ रुपए हो गई। लेकिन कच्चे माल की लागत व ब्याज अदायगी बढ़ने से मुनाफा घटकर 45.78 करोड़ रुपए पर आ गया। कंपनी ने बीते पूरे वित्त वर्ष 2010-11 में 1115.32 करोड़ रुपए की आय पर 205.83 करोड़ रुपए का शुद्ध मुनाफा कमाया था और उसका ईपीएस (प्रति शेयर मुनाफा) 6.51 रुपए था।
अभी ठीक पिछले बारह महीनों (टीटीएम) में कंपनी का ईपीएस 6.01 रुपए रहा है और इस आधार पर उसका शेयर फिलहाल 16.3 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है। यह शेयर दो साल पहले जनवरी 2010 में 51.87 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो चुका है। इससे इसके बढ़ सकने की सीमा का अंदाज लगाया जा सकता है। कंपनी का नियोजित पूंजी पर रिटर्न 35.17 फीसदी और नेटवर्थ या इक्विटी पर रिटर्न 29.62 फीसदी है। उसका ऋण-इक्विटी अनुपात मात्र 0.27 है। इसलिए मेरा कहना है कि इसे लंबे वक्त के लिए भी खरीदा जा सकता है।
जागरण प्रकाशन के टक्कर की एक ही कंपनी है और वो है भास्कर समूह की मालिक डीबी कॉर्प। डीबी कॉर्प का लाव-लश्कर थोड़ा बड़ा है। इसलिए उसकी बिक्री 2010-11 में जागरण से थोड़ी ज्यादा 1261.64 करोड़ रुपए रही है। उसका लाभ मार्जिन भी जागरण से थोड़ा अधिक है। उसका भी शेयर जागरण के लगभग बराबर 16.2 के पी/ई पर ट्रेड हो रहा है। लेकिन भास्कर समूह छिछला है, जबकि जागरण समूह में गहराई है। जागरण समूह में व्यापकता है। मिड डे उसका हो चुका है। पंजाबी जागरण अलग से आ चुका है।
जागरण प्रकाशन की कुल 63.25 करोड़ रुपए की इक्विटी में प्रवर्तकों का हिस्सा 59.51 फीसदी और पब्लिक का हिस्सा 40.49 फीसदी है। पब्लिक के हिस्से में से एफआईआई के पास 11.42 फीसदी और डीआईआई के पास 15.85 फीसदी है। कॉरपोरेट निकायों के पास कंपनी के 8.39 फीसदी शेयर हैं। बाकी बचे 4.83 फीसदी हिस्से में से अनिवासी भारतीयों व ट्रस्टों को निकाल दें तो सचमुच की पब्लिक के पास केवल 4.75 फीसदी शेयर बचते हैं। कंपनी के कुल शेयरधारकों की संख्या 43,881 है। इसमें से 42,465 (96.8 फीसदी) एक लाख रुपए से कम लगानेवाले छोटे निवेशक हैं, जिनके पास कंपनी के मात्र 2.15 फीसदी शेयर हैं।

 (अर्थकाम ) http://www.arthkaam.com/jagran-stock-to-give-10-percent-return-in-10-15-days/16120/

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यहां है बाजार को मात देने का माद्दा

यहां है बाजार को मात देने का माद्दा

Sep 17 2011

 

शेयर बाजार के बारे में एक सिद्धांत नहीं, बल्कि परिकल्पना है जिसके मुताबिक, कोई भी निवेशक न तो दबे हुए मूल्य के स्टॉक को खरीद सकता है और न ही बढ़े हुए मूल्य के स्टॉक को बेच सकता है। इसे ईएमएच, एफिशिएंट मार्केट हाइपोथिसिस कहते हैं जिसे हम हिंदी में कुशल बाजार परिकल्पना कह सकते हैं। यह परिकल्पना सस्ते में खरीदो, महंगे में बेचों के सूत्र के परखचे उड़ा देती है। कहती है कि कोई भी निवेशक बाजार को लंबे समय में मात नहीं दे सकता। खैर, आगे बढ़ने के पहले अपने दो छोटे अनुभव।
आइनॉक्स लीज़र के बारे में हमने 16 अगस्त को कहा था कि, “दो महीने में इससे 10-20 फीसदी मुनाफा कमाया जा सकता है। 47 से 52 रुपए तक की रेंज है इसकी।” तब इसका भाव 43 रुपए था। करीब तीन हफ्ते में ही यह 8 सितंबर को 47.50 से 51 रुपए की रेंज तक चला गया और उस दिन 49.55 रुपए पर बंद हुआ था। हमने साफ कहा था कि दो महीने में जब भी यह स्तर हासिल हो जाए, बेचकर निकलें। फिलहाल कल, 16 सितंबर को यह गिरकर 45.55 रुपए पर बंद हुआ है।
पार्श्वनाथ डेवलपर्स के बारे में हमने इसी हफ्ते मंगलवार, 13 सितंबर को लिखा था कि यह 10 फीसदी रिटर्न यूं ही दे सकता है। तब उसका पिछला बंद भाव 59.50 रुपए था। हमने कहा था कि, “यह शेयर यहां से 65-66 रुपए तक जा सकता है। इसमें ज्यादा से ज्यादा एक महीने का वक्त लग सकता है। हो सकता है कि ऐसा  जल्दी भी हो जाए। अगले कुछ दिनों में हो जाए।” चार दिन में ही यह लक्ष्य हासिल हो गया। पार्श्वनाथ डेवलपर्स 66.70 रुपए तक जाने के बाद 65.95 रुपए पर बंद हुआ है।
जाहिर है कि हमने लंबे समय में तो नहीं, छोटे समय में सस्ते में खरीदकर महंगे में बेचने का माद्दा दिखा दिया और बाजार को मात दे दी। इसके लिए मैं अपने पुराने बंधु व सहयोगी राजशेखर को बधाई देना चाहता हूंऔर कामना करता हूं कि वे अपने सूत्रों से ऐसी खबरें अर्थकाम के पाठकों के लिए पेश करते रहेंगे। मजे की बात है कि कुशल बाजार परिकल्पना (ईएमएच) कहती है कि वित्तीय बाजार सूचनाओं के बारे में एकदम दक्ष या कुशल होता है। मतलब, किसी भी ट्रेड होनेवाली आस्ति के भाव सारी उपलब्ध खबरों या सूचनाओं को  जज्ब कर चुके होते हैं और किसी भी नई सूचना को आते ही सोख लेते हैं।
दूसरे शब्दों में शेयर हमेशा सारी उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर अपने वाजिब मूल्य पर ट्रेड हो रहे होते हैं। यहां कोई बंदा नई सूचना नहीं ला सकता क्योंकि बाजार के हाथ इतने लंबे है और वह खबरों व सूचनाओं के मामले में इतना दक्ष है कि कोई खबर उससे बच नहीं सकती। दुनिया के सबसे सफल निवेशक वॉरेन बफेट इस सिद्धांत को गलत मानते हैं। लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं कि शेयर बाजार नई-नई सूचनाओं या खबरों का खेल है। जिसके पास जितनी खास खबर जितनी जल्दी होगी, वह उतनी ही तेजी से यहां औरों को मात कर सकता है।
बाजार हमेशा खबरों या सूचनाओं की समता की बात करता है। यहां कायदन समान रूप से सबको उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर ट्रेडिंग होनी चाहिए। इसीलिए अंदर की सूचनाओं के आधार पर होनेवाली इनसाइडर ट्रेडिंग को गुनाह माना गया है। लेकिन अपना बाजार अविकसित है, इसमें कोई दो राय नहीं है। इसमें भी कोई दो राय नहीं हो सकती कि यहां सूचनाओं की विषमता है। सबसे बडी विषमता तो यही है कि यहां सारी सूचनाएं, सारी धारणाएं अंग्रेजी में उपलब्ध हैं। मूलतः हिंदी या अन्य भारतीय भाषाएं जाननेवालों के सामने मजबूरी है कि वे अंग्रेजी अच्छी-तरह जानें-समझें। नहीं तो भारत की विकासगाथा के फल को नहीं चख सकते।
दुनिया के किसी भी स्वाभिमानी या विकसित देश में ऐसा नहीं हो सकता कि उसके बाशिंदों के लिए कोई पराई भाषा विकास की शर्त बन जाए। और, वे इस पर गर्व भी करें। 18-19वीं सदी के रूस में लैटिन भाषा को लेकर ऐसा ही भाव था, ऐसा आभास मुझे लियो टॉलस्टॉय के उपन्यास युद्ध और शांति (वॉर एंड पीस) को सालों पहले पढ़ते हुआ था। लेकिन आज भी हम औपनिवेशिक गुलामी की जुबान को सिर पर बैठाए हुए थे। अरे, चीन अगर हमसे दो साल बाद 1949 में मुक्त होने के बाद इतनी तेजी से आगे बढ़ा है तो उसके पीछे एक अहम पहलू यह है कि उसने अपनी भाषा को कभी नहीं छोड़ा। वहां भी अग्रेजी सीखी जा रही है। लेकिन वहां चीनी जानना हिकारत और अंग्रेजी जानना गर्व की बात नहीं है। जर्मनी, फ्रांस, जापान हर जगह अपनी भाषा को सर्वोच्च स्वीकृति हासिल है।
खैर, बात लंबी होने लगी है। लेकिन यह एक ऐसी कचोट है जिसको लेकर मैं बहक जाता हूं। अंग्रेजी में पारंगत हूं। जर्मन भी जानता हूं। लेकिन अकेले मेरे जानने से तो गांव-गिराव के उन अपने लोगों का तो भला नहीं होगा, जिनके बीच से मैं निकला हूं और जिनके प्रति मेरी देनदारी बनती है। उसी को चुकाने की, उससे उऋण होने की कोशिश कर रहा हूं। बहुत कुछ नहीं कर सकता। लेकिन इतना भरोसा है कि सूचनाओं के मामले में जो अघोषित विषमता है, उसे जरूर दूर किया जा सकता है।
हम यह भी साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि आम भारतीय अवाम कहीं से हीन नहीं है। हिंदी समाज भी ऐसी सूचनाएं ला सकता है जो फिरंगियों या उनकी शोहबत में ऐश कर रहे खिलाड़ियों के पास नहीं है। आज अगर हम आइनॉक्स लीज़र और पार्श्वनाथ डेवलपर्स में पहले से खबरें लाकर आप तक पहुंचा सके हैं तो यह आगाज है कि इस बात का कि अपनी मिट्टी, अपने लोगों और अपनी भाषा में कितना माद्दा है। लेकिन ऐसी शेयर सलाहों के बारे में हम पुरानी बात फिर से दोहरा दें, “इसके पीछे कोई फंडामेंटल का तड़का नहीं है। सीधे-सीधे बाजार की मौजूदा विकृत शक्तियां का खेल है।” 
(अर्थकाम ) http://www.arthkaam.com/we-have-guts-to-beat-the-market/13179/



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